Author name: Nishant

high rise buildings during daytime
शिक्षा समाचार

UGC की नई गाइडलाइंस: असिस्‍टेंट प्रोफेसर बनने का नया रास्ता

केंद्रीय शिक्षा मंत्री का अहम निर्णय हाल ही में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने असिस्‍टेंट प्रोफेसर की भर्ती के लिए नई गाइडलाइंस जारी की हैं। इन गाइडलाइंस के अनुसार, NET क्वालीफाई करना अब आवश्यक नहीं होगा। यह निर्णय विद्यार्थियों और शिक्षण समुदाय के लिए राहत लेकर आया है, जो लंबे समय से NET की […]

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gray concrete temple
भारतीय इतिहास

भारतीय महाजनपदों और शासकों की अद्भुत दुनिया

संक्षिप्त प्रश्न-उत्तर: कौशल महाजनपद भारत का प्राचीन इतिहास महाजनपदों से भरा हुआ है, और उनमें से एक महत्वपूर्ण महाजनपद है कौशल। कौशल महाजनपद का हिस्सा था बौद्ध युग में महत्वपूर्ण स्थान रखता था। यह भौगोलिक दृष्टि से उत्तर भारत में था और इसकी राजधानी श्रावस्ती थी। कौशल महाजनपद अपने सांस्कृतिक और आर्थिक समृद्धि के लिए

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A fenced in area with two wooden buildings
इतिहास और संस्कृति

छत्तीसगढ़ का प्राचीन इतिहास: एक गहराई में जाओ

छत्तीसगढ़: प्राचीन काल का दृष्टिकोण छत्तीसगढ़, जिसे प्राचीन काल में दक्षिण कौशल के नाम से जाना जाता था, भारतीय उपमहाद्वीप के महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और ऐतिहासिक स्थानों में से एक है। यह वह क्षेत्र है जहाँ पर कई रजवाड़ों का उदय हुआ और जिनके शासन ने यहाँ की संस्कृति पर गहरा प्रभाव डाला। महत्वपूर्ण सांस्कृतिक केंद्र

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a church steeple with a cross on top
इतिहास और संस्कृति

प्राचीन छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति और धर्म

प्राचीन धर्मों का प्रभाव प्राचीन कालीन छत्तीसगढ़ की संस्कृति में धर्म का एक महत्वपूर्ण स्थान था। प्रारंभिक काल में जनजातीय धर्म प्रमुख था, जो स्थानीय परंपराओं और विश्वासों पर आधारित था। इसके बाद बौद्ध धर्म, जैन धर्म और वैष्णव धर्म का प्रभाव धीरे-धीरे बढ़ा। साथ ही, शैव धर्म ने भी इस क्षेत्र में अपनी जड़े

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low angle photography of beige concrete building
इतिहास

बस्तर क्षेत्र का प्रारंभिक इतिहास: गोंड जनजाति और काकतीय शासक

बस्तर क्षेत्र का ऐतिहासिक पृष्ठभूमि बस्तर क्षेत्र, भारतीय उपमहाद्वीप का एक समृद्ध और विविधित क्षेत्र है, जो अपने शुरुआती इतिहास में गोंड जनजातियों का गढ़ था। गोंड जनजाति ने इस क्षेत्र में स्वतंत्रता के साथ शासन किया और उनकी सांस्कृतिक धरोहर आज भी देखने को मिलती है। गोंड जनजाति का प्रभाव प्रारंभिक कल में, बस्तर

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temple during nighttime
इतिहास

कलचुरी वंश का इतिहास: संस्कृति और स्थापत्य का विकास

कलचुरी वंश का परिचय कलचुरी वंश का उदय 12वीं से 14वीं शताब्दी ईस्वी में छत्तीसगढ़ क्षेत्र में हुआ। इस वंश ने यहां दीर्घकाल तक शासन किया और छत्तीसगढ़ के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान बनाया। रतनपुर, जो कि कलचुरी वंश की राजधानी थी, ने इस समय में सांस्कृतिक और स्थापत्य विकास के मामले में असाधारण प्रगति

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grayscale photography of man standing near studio camera and woman sitting while holding book
इतिहास

सोमवंशी वंश का इतिहास: 10वीं से 12वीं शताब्दी तक

सोमवंशी वंश की स्थापना सोमवंशी वंश का इतिहास छत्तीसगढ़ की धरती पर 10वीं से 12वीं शताब्दी तक फैला हुआ है। इस वंश के शासकों ने दक्षिण कौशल पर अपनी पकड़ मजबूत की। सोमवंशी शासकों का उद्देश्य क्षेत्र में सत्ता स्थापित करना और अपने अधीन आने वाले लोगों की भलाई के लिए प्रयास करना था। धार्मिक

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background pattern
यात्रा और पर्यटन

छत्तीसगढ़ का कौशल क्षेत्र: इतिहास और संस्कृति का संगम

छत्तीसगढ़: एक ऐतिहासिक विशेषता छत्तीसगढ़, भारतीय उपमहाद्वीप का एक महत्वपूर्ण कौशल क्षेत्र है, जिसने अपनी समृद्ध संस्कृति और ऐतिहासिक धरोहर के लिए जाना जाता है। यहाँ सिरपुर जैसे स्थलों ने बौद्ध और ब्राह्मण धर्म के संदर्भ में उल्लेखनीय योगदान दिया। यह क्षेत्र वास्तुकला और कला का विकास करने वाले गुप्त काल और शरभपुरीय वंश का

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a tall building with a dome on top of it
इतिहास और संस्कृति

प्रमुख स्थल एवं उनकी विशेषता: सिरपुर, मल्हार, और ताला

सिरपुर: प्राचीन व्यापारिक केंद्र सिरपुर का नाम प्राचीन काल के प्रमुख व्यापारिक केंद्रों में शामिल है। यह स्थल अपनी ऐतिहासिक धरोहर और धार्मिक महत्व के लिए जाना जाता है। यहां बौद्ध विहार और लक्ष्मण मंदिर जैसे अद्भुत संरचनाएं हैं, जो इसकी समृद्ध संस्कृति को दर्शाते हैं। सिरपुर के इन मंदिरों के अवशेष, न केवल स्थापत्य

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इतिहास

पांडुवंशी वंश का इतिहास: दक्षिण कौशल पर एक नजर

पांडुवंशी वंश का परिचय पांडुवंशी वंश, जो सातवीं से दसवीं शताब्दी ईस्वी के मध्य अस्तित्व में था, दक्षिण कौशल में एक महत्वपूर्ण शक्ति के रूप में उभरा। इस वंश के शासकों ने सिरपुर को अपनी राजधानी बनाकर वहाँ अपनी प्रशासनिक और सामरिक शक्ति को स्थापित किया। पांडुवंशी शासकों का शासनकाल दक्षिण भारत के लिए एक

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